विशेष (10/10/2022)
पà¥à¤°à¥‡à¤® से ही देश है और साहितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤® का परà¥à¤¯à¤¾à¤¯ हैः पà¥à¤°à¥‹. दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€

नई दिलà¥à¤²à¥€, 10 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर। "पà¥à¤°à¥‡à¤® हमारी आवशà¥à¤¯à¤•ता है। हम सब उसे पाना चाहते हैं, लेकिन उससे पहले हमें पà¥à¤°à¥‡à¤® देना सीखना होगा, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤•ृति का नियम है जो देता है उसे ही मिलता है। हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ में जो देता है, उसे देवता कहते हैं। इसलिठजो हम देंगे, वही लौटकर आà¤à¤—ा। यदि हम साहितà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ देंगे, तो पाठकों के मन में à¤à¥€ वैसी ही à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ विकसित होगी।" यह विचार à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जन संचार संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के महानिदेशक पà¥à¤°à¥‹. (डॉ.) संजय दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ ने राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• नà¥à¤¯à¤¾à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गाजियाबाद में 'à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ साहितà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग' विषय पर आयोजित संगोषà¥à¤ ी को संबोधित करते हà¥à¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किà¤à¥¤ संगोषà¥à¤ ी की अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ करते हà¥à¤ पà¥à¤°à¥‹. दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ ने कहा कि साहितà¥à¤¯ शबà¥à¤¦ दो शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ से मिलकर बनता है। 'सः' और 'हितः', यानी à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ तरीका, जिसमें किसी à¤à¤• वरà¥à¤—, जाति या धरà¥à¤® की जगह, समसà¥à¤¤ विशà¥à¤µ और समाज के कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ निहित हो। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि साहितà¥à¤¯ ही à¤à¤• रासà¥à¤¤à¤¾ है, जहां हम अपने सांसà¥à¤•ृतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को बनाठऔर बचाठरख सकते हैं। इस अवसर पर चंडीगॠसे आठडॉ. अमरसिंह वधान ने कहा कि यदि वैशà¥à¤µà¤¿à¤• परिदृशà¥à¤¯ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जाà¤, तो सृषà¥à¤Ÿà¤¿ का हर आदमी पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का à¤à¥‚खा है। पà¥à¤°à¥‡à¤® मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिठऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ है, तो सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ मानव सांसों की बहती नदी है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि हमारे दो धà¥à¤°à¥à¤µ हैं- हृदय और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•, लेकिन हृदय मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। हमें हृदय से काम लेना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¾à¤·à¤¾ साहितà¥à¤¯ की रचना à¤à¥€ हृदय से ही होती है, जिसके माधà¥à¤¯à¤® से समाज के लोग अपना मारà¥à¤— तय करते हैं। गिरिडीह से आईं हिंदी और बांगà¥à¤²à¤¾ की विदà¥à¤·à¥€ डॉ. ममता बनरà¥à¤œà¥€ ने कहा कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ की साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पहचान में बांगà¥à¤²à¤¾ साहितà¥à¤¯ का विशेष योगदान है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने चैतनà¥à¤¯ महापà¥à¤°à¤à¥ की रचनाओं में पà¥à¤°à¥‡à¤® पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग से लेकर बंगाली साहितà¥à¤¯ के दिगà¥à¤—जों की रचनाओं में à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤® व सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पà¥à¤°à¤¸à¤‚गों के उदाहरण पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने रवींदà¥à¤°à¤¨à¤¾à¤¥ टैगोर के साहितà¥à¤¯-सृजन में पà¥à¤°à¤•ृति पà¥à¤°à¥‡à¤®, नारी पà¥à¤°à¥‡à¤®, देश पà¥à¤°à¥‡à¤® के महतà¥à¤µ पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला। संगोषà¥à¤ ी के दौरान पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° हिंदी परिषद के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– डॉ. अकेला à¤à¤¾à¤ˆ ने हिंदी और उरà¥à¤¦à¥‚ à¤à¤¾à¤·à¤¾ की रचनाओं में पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पà¥à¤°à¤¸à¤‚गों पर अपने विचार रखे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤• सामाजिक पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ है और बिना पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के हम सामाजिक नहीं बन सकते। पà¥à¤°à¥‡à¤® और सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को घर-घर तक पहà¥à¤‚चाने का करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ हर रचनाकार निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। इस अवसर पर à¤à¤šà¤à¤¸à¤à¤¸à¤¸à¥€ इंडिया के राजà¤à¤¾à¤·à¤¾ अधिकारी पà¥à¤°à¤®à¥‹à¤¦ कà¥à¤®à¤¾à¤° ने हिंदी को सरकारी कामकाज में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग में लाने पर जोर दिया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का संचालन राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• नà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के संपादक पंकज चतà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¥€ ने किया। संगोषà¥à¤ ी में सूचना à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤°à¤£ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के पà¥à¤°à¤•ाशन विà¤à¤¾à¤— के पूरà¥à¤µ निदेशक à¤à¤µà¤‚ पदà¥à¤®à¤¶à¥à¤°à¥€ से अलंकृत डाॅ. शà¥à¤¯à¤¾à¤® सिंह शशि, गृह मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के राजà¤à¤¾à¤·à¤¾ विà¤à¤¾à¤— में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रघà¥à¤µà¥€à¤° शरà¥à¤®à¤¾ à¤à¤µà¤‚ यू.à¤à¤¸.à¤à¤®. पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा के संपादक उमाशंकर मिशà¥à¤° ने à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¤¾ लिया। |
Copyright @ 2019.



